ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्"
जटा में शिव की है गंगा,
गले सर्पों की माला,
गले सर्पों की माला है।
गले सर्पों की माला है,
गले सर्पों की माला है।
आई विपदा जब श्रृष्टि पर,
तो शिव शम्भू ने ताला है।
सभी को चाह अमृत की,
कौन विष को चाहे को पीना।
सभी को चाह अमृत की,
कौन विष को चाहे को पीना।
कौन विष को चाहे पीना,
जगत की रखा के खातिर,
पिया है शिव ने विष प्याला है।
जटा में शिव की है गंगा,
गले सर्पों की माला।
तू शिव का नाम जप पगले,
तू कर न कोई भी चिंता।
तू शिव का नाम जप पगले,
तू कर न कोई भी चिंता।
तू कर न कोई भी चिंता,
सोचना क्या है जब सबका,
मेरा बाबा रखवाला है।
जटा में शिव की है गंगा,
गले सर्पों की माला।